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अन्नदान से अभयदान तक

बहुत पुरानी यह बात है एक गांव में एक पंडित रहता था। हालांकि चालीसगांव का वह एकमात्र पंडित था।

एक समय की बात है कि पंडित एक गांव में पहुंचा वह वहां किसी का विवाह कराने पहुंचा था।

सवेरे के वक्त सभी बड़े बूढ़े गांव की चौपाल पर बैठकर धूप सेक रहे थे ।गांव वालों ने पंडित को देख कर उस का अभिवादन किया उससे राम-राम कहा और उसके आने का कारण जाना। पंडित ने सभी से राम राम कहा और वहीं बैठ कर लोगों को उनका भविष्य बताने लगा।

पंडित ज्योतिष विद्या का प्रकांड पंडित था। इसलिए सभी लोग जिज्ञासा वश उससे कुछ ना कुछ जानने के लिए उसके पास उसे घेरकर खड़े हो गए। पंडित भी लोगों की जिज्ञासा का निराकरण करना चालू कर दिया तथा उनकी समस्याओं का हल बताने में व्यस्त हो गया ।

तभी उसकी नजर दो नौजवान युवकों पर पड़ी जो अपने कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर जंगल में लकड़ियां काटने के लिए जा रहे थे।

उन दोनों युवकों को देखकर अनायास ही पंडित जी के मुंह से निकल गया कि कितने मासूम और कोमल हैं । इस पर गांव वालों ने उनके ऐसा कहने का कारण पूछा तो पंडित जी ने कहा कि यह दोनों नौजवान आज शाम का ढलता हुआ सूरज नहीं देख पाएंगे अर्थात दोनों का आज अंतिम दिन है।

गांव वाले पंडित जी की भविष्यवाणी सुनकर बहुत ही व्याकुल हो गए पर होनी को कोई टाल नहीं सकता।

समय बिता पंडित जी भी लोगों की समस्याओं का हल बताने में व्यस्त हो गए शाम कब हो गई लोगों को पता ही नहीं चला तभी शाम के समय वही दोनों नौजवान अपने अपने कंधे पर लकड़ी का गट्ठर रख कर सामने से आते दिखाई दिए ।

अब तो पंडित जी को सांप सूंघ गया काटो तो खून नहीं वाली परिस्थिति हो गई । सभी गांव वाले उन्हें शंका की नजर से देख रहे थे ।क्योंकि पहली बार पंडित जी की भविष्यवाणी गलत साबित हुई थी ।

पंडित ने इशारे से दोनों नौजवानों को अपने पास बुलाया और उनसे वार्तालाप प्रारंभ किया पंडित जी ने पूछा कि आज उन दोनों ने जंगल में जाकर क्या किया वह उन्हें सविस्तार बताया जाए ।

यूवको ने कहा हम जंगल गए और लकड़ी काटना प्रारंभ किया दोपहर को हमने खाना खाया पानी पिया और फिर लकड़ी काटना शुरू कर दिया और शाम को लकड़ी का गट्ठर बनाकर कंधे पर रखकर आ रहे हैं।
अभी भी पंडित जी को संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने यूवको से पूछा कि कुछ भूले तो नहीं होना । तब युवकों ने कहा कि नहीं पर मुझे एक बात बतानी है आपको पंडित जी की जब हम दोपहर अपना खाना खाने बैठे तो पता नहीं कहीं से एक बूढ़ा यात्री आ गया वह काफी भूखा था । इसीलिए हम दोनों ने उसे अपने अपने खाने में से आधी आधी रोटी दे दी और वह यात्री आधी रोटी खाकर पानी पी कर चला गया । पंडितजी यह सुनकर थोड़े से आश्वस्त हो गए फिर तत्काल उन्होंने दोनों युवकों को अपना अपना लकड़ी का गट्ठर खोलने का कहा दोनों ही युवकों ने अपने अपने गट्ठर खोल दिए । गट्ठर को खोलते ही सभी गांव वालों की नजर उन गट्ठरो में दो सांप के कटे हुए टुकड़ों को देखकर फटी की फटी रह गई ।

तब सांप के दोनों टुकड़ों को दिखाते हुए पंडित जी ने गांव वालों से कहा देखा मेरी भविष्यवाणी गलत नहीं थी।

पंडित जी ने कहा कि इन दोनों की मृत्यु अटल थी पर मुझे नहीं पता था कि भगवान आधी रोटी के बदले में जीवनदान दे देता है।

दोस्तों एक बात हमेशा याद रखना जीवन में मनुष्य को इस दुनिया में जीने के लिए सिर्फ खाना और पानी की आवश्यकता है इसीलिए इस पूरे जगत में अन्न दान ही सर्वश्रेष्ठ दान है।

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