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तारीफ का भूखा है। Tarif ka bhukha hi.

कुत्तों को बदलने वाली इसी कॉमन सेंस भरी तकनीक का इस्तेमाल इंसानों को बदलने में क्यों नहीं करते ? हम कोड़े की बजाय गोशत का इस्तेमाल क्यों नहीं करते ? हम आलोचना के बजाय प्रशंसा का इस्तेमाल क्यों नहीं करते ?

हमें थोड़े से सुधार की भी तारीफ करनी चाहिए इससे सामने वाले व्यक्ति को सुधरने में प्रोत्साहन और प्रेरणा मिलती है।

प्रशंसा मनुष्य के हृदय के लिए सूर्य के सुखद प्रकाश की तरह है, इसके बिना हमारे व्यक्तित्व का पुष्प नहीं खिल सकता है।

इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जब प्रशंसा की जादुई छड़ी ने किसी व्यक्ति के जीवन को बदल कर रख दिया है।

हर व्यक्ति तारीफ पसंद करता है, परंतु जब यह तारीफ किसी खास बात को लेकर की जाती है तब हमें पता चलता है कि तारीफ सच्ची है कि सामने वाला व्यक्ति हमें मूर्ख नहीं बना रहा है या हमें सिर्फ खुश करने के लिए यह बात नही कह रहा है।

हम सब प्रशंसा और सम्मान के भूखे हैं और इन्हें पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। परंतु हममें से कोई भी व्यक्ति झूठी तारीफ पसंद नहीं करता है। कोई भी चापलूसी पसंद नहीं करता।

क्या आप लोगों को बदलने के बारे में सोच रहे हैं। अगर आप और मैं उन लोगों‌ को प्रेरित कर सकें जिनके हम संपर्क में आते हैं, तो हम जान जाएंगे कि उनमें कितनी संभावनाएं, कितने खजाने छुपे हैं और हम उन्हें बदलने से अधिक कुछ कर सकते हैं। हम शब्दश: उनकी काया पलट कर सकते हैं।

हम जो हो सकते हैं उसकी तुलना में हम सिर्फ आधे जागे हुए होते हैं। हम अपनी क्षमताओं का बहुत कम हिस्सा ही हासिल पाते हैं। हम अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यताओं का बहुत थोड़ा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। इंसान अपनी संभावनाओं का पूरा दोहन नहीं करते हैं। उनके पास बहुत सी ऐसी क्षमताएं या शक्तियां होती हैं जिनका उपयोग करने में वे आमतौर पर असफल रहते हैं।

आप में भी ऐसी शक्तियां और क्षमताएं हैं जिनका उपयोग करने में आप आमतौर पर असफल रहते हैं, और जिन शक्तियों का आप पूरी तरह उपयोग नहीं कर रहे हैं, उनमें एक है लोगों की तारीफ करने की और उन्हें प्रेरित करने की जादुई क्षमता, जिससे उनकी निहित संभावनाओं का दोहन किया जा सके।

योग्यताएं आलोचना के तुषार से कुम्हला जाती है, परंतु प्रोत्साहन की खाद मिलने से वे फलने फूलने लगती हैं।

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