Skip to main content

जीतने में जो आनंद नहीं - वह जिताने में है । - Jeetne main woh anand nahi jo jitaane main hai

खरगोश कछुए के पास आया और उससे एक बार फिर दौड़ने की प्रतियोगिता करने को कहा । उसने कहा कि उसके एक पूर्वज ने पहले दौड में हारकर उनकी बिरादरी का नाम नीचा कर दिया था । वह उस दौड को जीतकर नई पीढ़ी का नाम रौशन करना चाहता था ।

कछुआ तैयार हो गया । निश्चित दिन और समय पर जंगल के राजा शेर ने दौड़ शुरू करवाई । खरगोश ने दौड़कर लगभग पूरा रास्ता मिनटों में पार कर लिया । वह अंतिम रेखा से केवल सौ कदम दूर था । वह सांस लेने के लिए रुका । उसने सोचा कि वह कछुए को देखते ही दौड़ पूरी कर लेगा । लेकिन रुकने पर उसकी नींद लग गई । कोई पन्द्रह मिनट के बाद ,कछुआ वहां पहुंचा।

खरगोश के पास पहुंचकर कछुआ कुछ देर रुका और सोचा... फिर उसने खरगोश को नींद से जगाया और बोलो," तुम क्या कर रहे हो ? क्या तुम्हें तुम्हारे पूर्वज द्वारा तुम्हारी बिरादरी का नाम नीचा कर देना याद नही ? क्या तुम्हें नही पता कि तुम्हारे यहां सोने से हमारी नई पीढ़ी को कितनी समय शर्मिन्दगी उठानी पड़ेगी ? उठो, और बाकी दौड़ पूरी करो । मैं भी आता हूं।"

खरगोश अचरज में पड़ गया । उसने कहा," फिर कुछ, जब तुम खुद दौड़ जीत सकते थे, तो तुमने मुझे क्यों जगाया ?"

कछुआ बोला," हमारा किसी दौड़ को जीतना या हारना कोई मायने नहीं रखता । सभी जानते हैं कि हम सबसे धीमे चलते हैं । लेकिन तुम्हारे साथ ऐसा नहीं है । सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर होने पर भी तुम्हारी बिरादरी आज तक एक कछुए से हार जाने का दु:ख मनाती है । मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी बिरादरी आगे भी यही दु:ख मनाती रहे।"

खरगोश ने कछुए को गले लगाकर कहा," कछुआ ,तुम इस बार भी जीत गए हो ।"

Comments

Popular posts from this blog

निंदा - Ninda

निंदा पत्नी ने पति से कहाँ- टीवी कि आवाज जरा कम कर दो इस आवाज की वजह से पडोस मैं जो पति- पत्नी झगड रहे है वह मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। सबक दुसरो कि निंदा सुनने में बडा आंनद आता है इस लिए गुरु के हितकारी प्रवचन हम सुन नहीं सकते हैं। निंदा करना और सुनना प्रवचन सुनने के लिए बाधक भी है और उसके प्रभाव को नाश करने वाला है।

लक्ष्मण को दिया था रावण ने अंतिम संदेश Lakshman ko diya tha ravan ne antim Sandesh

रावण जब मृत्यु शैया पर थे तब राम ने लक्ष्मण से कहा कि, "तुम रावण के पास शीघ्र पहुंचों। उसके पास अमूल्य ज्ञान है, उसे अर्जित करो। उससे जगत के लिए अंतिम संदेश ले आओ।" लक्ष्मण दौड़े। उसने रावण से कहा, "राम रो रहे हैं।" रावण के द्वारा वजह पूछने पर लक्ष्मण ने बताया कि "आपके अंतकाल से व्यथित हुए हैं। मुझे आपके पास अंतिम संदेश प्राप्त करने के लिए भेजा है। बड़े भैया ने कहलवाया है कि "आप अनेक गुणों के भंडार हैं। सीता का अपहरण तो आपकी आकस्मिक (कर्मोदय जनित) भूल थी।" आंख में अश्रु सहित रावण ने कहा कि "मेरे जैसे शत्रु का भी राम गुणकथन करते हैं। इसी लिए राम जगत में भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।" अब आपको मेरा अंतिम संदेश यह है, कि" आज की बात कल पर छोड़नी नहीं चाहिए। मेरी इच्छा थी कि मैं स्वर्गगमन के लिए धरती पर सीढी रखूं, जिससे सभी जीव स्वर्गारोहण कर सकें, कोई भी नरक की दिशा में गति न करें, पर वह कार्य अधूरा ही रह गया। मैंने इस काम में विलंब किया और मौत वेग से आगे बढ़ गई। अब अफसोस करने में क्या लाभ। Rich Dad Poor Dad - 20th Anniversa...

मन में उत्पन्न भावों का प्रभाव अत्यंत बलशाली होता है। Maan main utpann bhavo ka prabhav atyant balshali hota hai.

एक हाथी प्रतिदिन पानी पीने के लिए बाजार में से होकर नदी के किनारे पर जाया करता था। मार्ग में दर्जी की दुकान आती थी। दर्जी पशु - प्रेमी था। हाथी जब भी उधर से गुजरता तो उसे खाने के लिए कुछ ना कुछ जरूर देता। हाथी भी खुश हो जाता। वह भी जब पानी पीकर वापस आता तो उद्यान में से पुष्पों को तोड़कर दर्जी की दुकान पर डाल जाता। प्रतिदिन का यह कार्यक्रम बन गया। एक दिन दर्जी किसी कार्य अवश्य बाहर गया हुआ था। दुकान पर उसका बेटा बैठा हुआ था। हाथी प्रतिदिन के कार्यक्रम के अनुसार दर्जी की दुकान पर जाकर अपनी सूंड को लंबा किया। दर्जी पुत्र को पिता के कार्य की जानकारी ना होने से अपनी भावना के अनुसार हाथी की सूंड पर जोर से सुई लगा दी। हाथी चुपचाप वहां से चला गया। हाथी पंचेइंद्रियों प्राणी है। उसके पास मन है। दर्जी पुत्र के दुर्व्यवहार से उसका मन ग्लानि से भर गया। नदी के किनारे पानी को पीया। प्रतिदिन तो उद्यान में जाकर फूलों को तोड़ता था, आज उसने बगीचे में ना जाकर गंदे नाले के पास गया, वहां सूंड में कीचड़ भर लिया। जैसे ही दर्जी की दुकान के पास पहुंचा और कीचड़ से भरी सूंड को उसकी दुकान पर उछाला। दर्जी पुत्र भी...