रावण जब मृत्यु शैया पर थे तब राम ने लक्ष्मण से कहा कि, "तुम रावण के पास शीघ्र पहुंचों। उसके पास अमूल्य ज्ञान है, उसे अर्जित करो। उससे जगत के लिए अंतिम संदेश ले आओ।"
लक्ष्मण दौड़े।
उसने रावण से कहा, "राम रो रहे हैं।"
रावण के द्वारा वजह पूछने पर लक्ष्मण ने बताया कि "आपके अंतकाल से व्यथित हुए हैं। मुझे आपके पास अंतिम संदेश प्राप्त करने के लिए भेजा है। बड़े भैया ने कहलवाया है कि "आप अनेक गुणों के भंडार हैं। सीता का अपहरण तो आपकी आकस्मिक (कर्मोदय जनित) भूल थी।" आंख में अश्रु सहित रावण ने कहा कि "मेरे जैसे शत्रु का भी राम गुणकथन करते हैं। इसी लिए राम जगत में भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।"
अब आपको मेरा अंतिम संदेश यह है, कि" आज की बात कल पर छोड़नी नहीं चाहिए। मेरी इच्छा थी कि मैं स्वर्गगमन के लिए धरती पर सीढी रखूं, जिससे सभी जीव स्वर्गारोहण कर सकें, कोई भी नरक की दिशा में गति न करें, पर वह कार्य अधूरा ही रह गया। मैंने इस काम में विलंब किया और मौत वेग से आगे बढ़ गई। अब अफसोस करने में क्या लाभ।
बड़प्पन उम्र से नहीं अच्छे कर्मों से सिद्ध होता है badappan umra se nahin acche karmon se siddh hota hai
बड़ा तो गधा भी हो जाता है और कुत्ता भी हो जाता है, गुंडा भी हो जाता है और दुर्जन भी हो जाता है, चोर भी हो जाता है और व्यभिचारी भी हो जाता है। मात्र समय व्यतीत होता है और यह सभी बड़े हो जाते हैं। परंतु, यह " बड़प्पन " न तो गौरवप्रद बनता है और न ही किसी के लिए आलंबन रूप बनता है। परंतु…… एक बड़प्पन ऐसा है कि जिसका संबंध समय के साथ नहीं, पर सत्कार्यों के साथ है। उम्र के साथ नहीं, पर विवेक के साथ है। यह बड़प्पन गौरवप्रद भी बनता है और अनेकों के लिए आलंबन रूप भी बनता है। एक सनातन सत्य हमें आंखों के सामने रखना है और वह यह है कि जिंदगी की लंबाई बढ़ाने के लिए हम कुछ भी नहीं कर सकते लेकिन हमारे हाथ में यह दो चीजें हैं - जिंदगी की चौड़ाई हम बढ़ा सकते हैं, जिंदगी की गहराई हम बढ़ा सकते हैं। जीवन को यदि हम सत्कार्यों से महका रहे हैं तो हमारे जीवन की चौड़ाई बढ़ रही है और उन सत्कार्यों के फल - स्वरुप यदि हमारे मन की प्रसन्नता बनी रहती है तो हमारे जीवन की गहराई बढ़ रही है। पर कैसी दयनीय दशा है हमारी ? जीवन की इस जिस लंबाई को बढ़ाने में स्वयं परमात्मा को भी सफलता नहीं मिली उस लंबाई को बढ़ाने ...
Bahut achhi jankari
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