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आत्मा और शरीर के रहस्य को समझो। Aatma aur sharir ke Rahasya ko samjho .

पानी पर खींची लकीर जैसा है जीवन।

पानी पर लकीर खींच भी नहीं पाते और लकीर मिट जाती है । हम जन्म की खुशियां मना भी नहीं पाते हैं और मौत का मातम छा जाता है। लोग भी कितने नासमझ हैं ।अपने बर्थ-डे को तो याद रखते हैं ; उसे धूमधाम से मनाते हैं मगर मृत्यु की कभी चर्चा भी नहीं करते, और अगर कोई भूल से पूछ ले कि भाई साहब ! आप कब मरोगे ? तो शायद तुम गुस्से में उसे ही मार डालो। लोगों को जीवन का उभरना तो याद रहता है, पर वह दिन का ढलना भूल जाते हैं। सूरज उग गया है तो अब ढलने में देर नहीं लगने वाली है।

जिसको तुम जवानी कहते हो, वह तो आधे दिन का पूरा हो जाना है। जवानी आधी मौत है। जवानी पर ज्यादा मत इतराओ मत। सोच लो , तुम आधे मर गए। तुम अधमरे हो गए हो और अधमरा कब तक जिंदा रहेगा। वह तो पहले ही आधा मरा हुआ होता है।

तो तुम्हारे शरीर की हैसियत एक मुट्ठी राख से ज्यादा नहीं है। यह जो पांच-छह फुट का सुंदर शरीर दिख रहा है ना और जिसको सजाने- संवारने और सुखी रखने के लिए तुम दिन भर पाप करते हो । शरीर की जवानी के नशे में आकर तुम धर्म, तप, त्याग, भगवान सबको भूल गए हो।

यह शरीर जिस दिन चार लोगों के कंधों पर चढ़कर शमशान पहुंच जाएगा और चिता पर चढ़ेगा तो सब कुछ देखते ही देखते स्वाहा हो जाएगा । शेष केवल एक मुट्ठी भर राख बचेगी, और उस एक मुट्ठी राख पर इतनी अकड़ । नादानी की भी हद होती है

तुम्हें यह जानकर और भी आश्चर्य होगा कि लाखों करोड़ों रुपयों के गहने पहनने वाले तुम्हारे शरीर की कुल कीमत सिर्फ साडे $4डालर यानी करीब ₹211 है।

हाथी तो मरने के बाद भी सवाल लाख का होता है लेकिन इंसान की शरीर की कुल कीमत ₹250 रूपये भी नहीं है।

शरीर में 65% ऑक्सीजन है 18% कार्बन है 10% नाइट्रोजन 1:30 प्रतिशत कैल्शियम 1 प्रतिशत फास्फोरस 0.35 प्रतिशत पोटेशियम है,0.15 सोडियम है,0.15 प्रतिशत क्लोरीन है,0.05 प्रतिशत मैग्नीशियम है,0.0004 आयरन है, और 0.00004 प्रतिशत आयोडीन है। इन सब की कीमत ₹211 है।


तुम इसे क्या समझ रहे हो ?

मैं तुम्हें तुम्हारी असली तस्वीर दिखा रहा हूं। इस तस्वीर को गौर से देखो और स्वीकार करो। आदमी केवल सुंदर चेहरे से नहीं पूजा जाता, बल्कि अच्छे चरित्र से पूजा जाता है। आदमी में प्रेम का स्पर्श हो मुख में मिठास हो ,आंखों में तेज हो, जीवन में सत्य हो और हाथों में दान हो तो वह पूज्य होता है, नहीं तो आदमी धूल है। एक मुट्ठी राख है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

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