कुरुक्षेत्र का अठारह दिन का युद्ध समाप्त हुआ।
सारथि श्री कृष्ण अर्जुन सहित रथ को शिविर की दिशा में ले गए। रथ का नाम नंदीघोष था। रथ से रोज पहले श्री कृष्ण उतरते थे पर आज श्री कृष्ण नहीं उतरे। उन्होंने अर्जुन को पहले उतरने के लिए कहा। यह भेद अर्जुन की समझ में नहीं आया। वह नीचे उतरे। बाद में श्रीकृष्ण उतरे।
जैसे ही कृष्ण नीचे उतरे रथ धधकती हुई आग में भस्म हो गया।
अर्जुन की समझ में कुछ नहीं आया। उसने कृष्ण को रहस्य अनावृत्त करने के लिए कहा।
कृष्ण ने कहा, "अर्जुन !
अट्ठारह दिवस के युद्धकाल में रथ अग्नेयास्त्र आदि अनेक बाण लगे हुए थे।
अतः रथ अंदर में तो सर्वत्र जल ही रहा था परंतु रथ में मेरा अस्तित्व होने के कारण वह पूर्णतया जल नहीं सकता था। आज युद्ध समाप्त हुआ। अतः मेरे उतरने के बाद रथ जल गया।
यदि आज मैं पहले उतरा होता तो तुरंत रथ ज्वाला ग्रसित हो जाता और उसमें तुम भी खाक हो जाते। इसीलिए मैंने आज तुम्हें पहले उतार दिया।"
जिस घर में भगवान (ग्रह चैत्यालय ) होगा वे घर जमानेवाद के अगन गोलों की वर्षा में भी जलेंगे नहीं। जहां भगवान का अस्तित्व होगा वहां किसी भी प्रकार की कठिनाइयां या दु:ख या दोष नहीं फटकेंगे।
प्राय: स्कूल या कॉलेज से मित्रता की शुरुआत होती है। हम जिन लोगों के बीच रहते हैं, अपना अधिकांश समय व्यतीत करते हैं, उनसे हमारा परिचय होता है, संबंध प्रगाढ़ होते हैं, मित्रता बढ़ती है और हमको लगता है कि यह सब हमारे मित्र हैं, क्या वे वाकई हमारे मित्र हैं, हम अपना विवेक जगाएं और देखें कि क्या वाकई वे सभी हमारी मित्रता के लायक हैं ? अगर किसी में कोई कुटेव है तो आप तुरंत स्वयं को अलग कर लें, नहीं तो वे आदतें आपको भी लग जाएंगीं। अगर आपको सिगरेट पीने की आदत पड़ चुकी है तो झांकें अपने अतीत में। आपको दिखाई देगा कि आप विद्यालय या महाविद्यालय में पढ़ते थे, चार मित्र मिलकर एक सिगरेट लाते थे और किसी पेड़ की ओट में आकर सिगरेट जलाते और एक ही सिगरेट को बारी-बारी से चारों पीते थे। पहले छुप-छुपकर, फिर फिल्म हॉल में गए तब, फिर इधर-उधर हुए तब, फिर बाथरूम में पीने लगे और धीरे-धीरे सब के सामने पीने लगे। इस तरह पड़ी जीवन में एक बुरी आदत और आपने उन्हीं लोगों को अपना मित्र मान लिया, जिन लोगों ने आपके जीवन में बुरी आदत लगाई। अगर आप गुटखा खाते हैं तो सोचे कि इसकी शुरुआत कहां से हुई। जरूर आपकी किसी ऐसे व्यक्ति ...
ateew sundar !
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