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हृदय में प्रीति और व्यवहार में नीति होना अति आवश्यक है hriday mein prati aur vyavhar mein niti Hona ati avashyak hai


घर में वस्तुएं नियत स्थान पर रखी जाती है तो ही घर की शोभा बढ़ती है।
झाड़ू दरवाजे के पीछे, टी.वी. शोकेस में , कपड़े अलमारी में और जवाहरात है तिजोरी में……..
इसमें थोड़ी भी गड़बड़ होती है तो घर की शोभा घटने लगती है।
प्रश्न हृदय का है और व्यवहार का है।
जीभ पर प्रीति और हृदय में उपेक्षा हो तो ? शब्दों में नीति की बात हो और व्यवहार में अनीति हो तो ?
निश्चित संबंध और व्यवहार दोनों दूषित बनते हैं। वर्तमान विज्ञान युग का मनुष्य दो विषयों में भारी मात खा रहा है।
परिचय उसे जड़ का करना था उसे इसके बदले जीवों को उसने परिचय का विषय बना दिया और प्रेम उसे जीवों के प्रति करना था इसके बदले उसने जड़ को प्रेम का विषय बना दिया।
गाड़ी पर उसे प्रेम है और गाड़ी के ड्राइवर का उसे परिचय है!
मोबाइल पर उसे प्रेम है और घर के नौकर का उसे परिचय है!
पैसे पर उसे प्रेम हैं और पत्नी का उसे परिचय है !
आंखों में लगाने का काजल गालों पर लगाए लगाया जाए और नाक में डालने वाली दवाई आंख में डाली जाए तो इससे तो तकलीफ होती है, जो मजाक उड़ता है ऐसी ही तकलीफ आज के मानव को हो रही है, ऐसा ही मजाक आज उसका उड़ रहा है। एक दूसरी बात,
आज के मनुष्य के भीतर चलाकी इस हद तक रच - बस गई है कि उसके व्यवहार में मित्रता के उतने दर्शन नहीं होते जितने दंभ के होते हैं।
वह सच भी बोलता है तो उस पर विश्वास करने के लिए कोई तैयार नहीं होता। वह सीधा भी चलता है तो उसकी सीधी चाल को लोग संदेह की दृष्टि से देखते हैं।
क्या कहूं ?
जहां बुद्धि का विकास बढ़ता जाए और हृदय का विकास घटता जाए वहां ऐसी परिस्थिति निर्मित न हो तो ही आश्चर्य है ! कम से कम हम तो ऐसी स्थिति में से बाहर निकल जाए ।


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