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मदद करें, अहसान नहीं... Madad Kare, ahsaan nahi


आप अपने पुत्र को व्यवसाय के लिए पांच लाख दे सकते हैं तो क्या अपने भाई को, चाहे वह आपसे अलग भी हो चुका है, पर दुविधा में पांच लाख व्यवसाय के लिए नहीं दे सकते ?
अगर आपके बेटे ने कुछ गलत काम कर दिया, कहीं रुपए डुबो दिए, दिवाला निकाल दिया या शेयर मार्केट में पच्चीस लाख डूबा दिए तो आप अपना मकान बेचकर भी कहते हैं कि बेटा नुकसान कर आया तो भी इज्जत तो रखनी ही पड़ेगी। अरे, भाई के साथ ऐसा हो जाए तब ?
तब भी काम आओ।
अगर आपके पड़ोसी के कार आ जाए तो जलना मत कि उसके कार आ गई और मेरे तो अभी स्कूटर ही है। यह सोचना कोई बात नहीं। उसके कार आ गई, अच्छा हो गया, मेरी गली में तो एक भी कार नहीं थी, मां बूढ़ी है अगर कभी रात में बीमार हो गई तो पड़ोसी इतना भला है कि कभी तो कार काम आ जाएगी।
औरों के साथ नि:स्वार्थ भाव से पेश आएं। अपने मन को दूसरों के प्रति निर्मल रखें। किसी का कुछ करके कृतज्ञता पाने की कोशिश ना करें और ना ही किसी से कुछ पाकर कृतज्ञ बने। दूसरों के सहयोगी बने। अगर आपको पता चल जाए कि आपका पड़ोसी दुकानदार किसी मुसीबत में आ गया है तो उसे नजरअंदाज ना करें। उसकी मुसीबत में सहयोगी बनें।
जो मुसीबत आज उस घर में आई है कल आपके घर में भी आ सकती है। याद रखें मुसीबत किसी व्यक्ति विशेष के पास नहीं आती, वह किसी का भी दरवाजा खटखटा सकती है। एक - दूसरे का सहयोगी बनना ही मित्रता और मानवता की कसौटी है।


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