एक साधु स्वामी विवेकानन्द जी के पास आया। अभिवादन करने के बाद उसने स्वामी जी को बताया कि वह उनके पास किसी विशेष काम से आया है।
" स्वामी जी, मैने सब कुछ त्याग दिया है,मोह माया के बंधन से छूट गया हूँ परंतु मुझे शांति नहीं मिली। मन सदा भटकता रहता है।
एक गुरु के पास गया था जिन्होंने एक मंत्र भी दिया था और बताया था कि इसके जाप से अनहदनाद सुनाई देगा और फिर शांति मिलेगी। बड़ी लगन से मंत्र का जाप किया, फिर भी मन शांत नहीं हुआ।अब मैं परेशान हूँ। " इतना कहकर उस साधु की आँखे गीली हो गई।
" क्या आप सचमुच शान्ति चाहते हैं ", विवेकानन्द जी ने पूछा।
बड़े उदासीन स्वर में साधु बोला , इसीलिये तो आपके पास आया हूँ।
स्वामी जी ने कहा , "अच्छा ,मैं तुम्हें शान्ति का सरल मार्ग बताता हूँ। इतना जान लो कि सेवा धर्म बड़ा महान है।घर से निकलो और बाहर जाकर भूखों को भोजन दो,प्यासों को पानी पिलाओ , विद्यारहितों को विद्या दो और दीन ,दुर्बल ,दुखियों एवं रोगियों की तन, मन और धन से सहायता करो। सेवा द्वारा मनुष्य का अंतःकरण जितनी जल्दी निर्मल,शान्त,शुद्ध एवं पवित्र होता है ,उतना किसी और काम से नहीं। ऐसा करने से आपको सुख , शान्ति मिलेगी। "
साधु एक नए संकल्प के साथ चला गया। उसे समझ आ गयी कि मानव जाति की
निःस्वार्थ सेवा से ही मनुष्य को शान्ति प्राप्त हो सकती है।
प्राय: स्कूल या कॉलेज से मित्रता की शुरुआत होती है। हम जिन लोगों के बीच रहते हैं, अपना अधिकांश समय व्यतीत करते हैं, उनसे हमारा परिचय होता है, संबंध प्रगाढ़ होते हैं, मित्रता बढ़ती है और हमको लगता है कि यह सब हमारे मित्र हैं, क्या वे वाकई हमारे मित्र हैं, हम अपना विवेक जगाएं और देखें कि क्या वाकई वे सभी हमारी मित्रता के लायक हैं ? अगर किसी में कोई कुटेव है तो आप तुरंत स्वयं को अलग कर लें, नहीं तो वे आदतें आपको भी लग जाएंगीं। अगर आपको सिगरेट पीने की आदत पड़ चुकी है तो झांकें अपने अतीत में। आपको दिखाई देगा कि आप विद्यालय या महाविद्यालय में पढ़ते थे, चार मित्र मिलकर एक सिगरेट लाते थे और किसी पेड़ की ओट में आकर सिगरेट जलाते और एक ही सिगरेट को बारी-बारी से चारों पीते थे। पहले छुप-छुपकर, फिर फिल्म हॉल में गए तब, फिर इधर-उधर हुए तब, फिर बाथरूम में पीने लगे और धीरे-धीरे सब के सामने पीने लगे। इस तरह पड़ी जीवन में एक बुरी आदत और आपने उन्हीं लोगों को अपना मित्र मान लिया, जिन लोगों ने आपके जीवन में बुरी आदत लगाई। अगर आप गुटखा खाते हैं तो सोचे कि इसकी शुरुआत कहां से हुई। जरूर आपकी किसी ऐसे व्यक्ति ...
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