उपर्युक्त पिछले तीन कारणों से आये हुए स्वप्न शुभाशुभ फल देते है, ऐसे स्वप्न यथासम्भव व्यर्थ नहीं जाते ।
स्वप्न फल किसे मिलता है ?
जो आदमी स्थिर-चित्त, जितेन्द्रिय शांत मुद्रा, धर्म भाव में रुचि रखनेवाला धर्मानुरागी, प्रामाणिक, सत्यवादी, दयालु, श्रध्दालु, और गृहस्थोचित गुणों वाला होता है, उसे स्वप्न आता है, वह निरर्थक नहीं जाता, वह कर्मानुसार अच्छा या बुरा फल यथासमय तुरन्त देता है ।
स्वप्न कब फलता है ?
यदि रात के पहले प्रहर में स्वप्न देखा गया तो, उसका फल एक वर्ष में प्राप्त होता है। दूसरे प्रहर में देखे तो छः मास में, तीसरे प्रहर में देखे तो तीन मास में, रात के चौथे प्रहर में देखे तो एक मास, रात्रि की अन्तिम दो घडियों अर्थात तडके देखे तो दस दिन में और सूर्य उदय होते होते देखे तो उसका तत्काल फल मिलता है।
बुरा स्वप्न आने पर यदि सोते रहे तो अच्छा रहता है। उसे किसी को न कहे, यथासम्भव उसे भूलने का प्रयत्न करना चाहिए।
उत्तम स्वप्न होने पर यदि हम सोते रहने की भूल कर बैठे तो उसका फल निष्फल हो जाता है।
शुभ स्वप्न देखनेवाले को जागृत होकर भगवान का भजन करना चाहिये।
प्रातःकाल होने पर गुरुजनों के सम्मुख विनय युक्त होकर निवेदन करे। यदि गुरु के योग ना हो तो कोई योग्य आदमी और वो भी न मिले तो स्वप्न गाय के कान में सुना देना उचित होता है। परन्तु मूर्ख को कभी न सुनायें। यदि मुर्ख को सुनायें तो उस स्वप्न का फल जैसा वह बतायेगा उससे विपरीत या अपूर्ण हो जायेगा। उत्तम स्वप्न जानने वाले के सामने कहने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। मूर्ख को बताने की अपेक्षा मन में रखना या गौ के कान में कहना उचित होता है।
कुछ आचार्यों का मत है कि यदि स्वप्न किसी को न कहा जाये तो उसका फल नहीं होता है।
निंदा पत्नी ने पति से कहाँ- टीवी कि आवाज जरा कम कर दो इस आवाज की वजह से पडोस मैं जो पति- पत्नी झगड रहे है वह मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। सबक दुसरो कि निंदा सुनने में बडा आंनद आता है इस लिए गुरु के हितकारी प्रवचन हम सुन नहीं सकते हैं। निंदा करना और सुनना प्रवचन सुनने के लिए बाधक भी है और उसके प्रभाव को नाश करने वाला है।
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