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अपने ही अपनों के दुश्मन होते हैं - Apane hee apanon ke dushman hote hain



बहुत ही पुरानी बात है । जब मैं बहुत छोटा हुआ करता था मेरी बहनें मुझे सभी बड़ी है। मैं छोटा था घर में मेरी बहनों की शादी हो गई थोड़े ही दिनों में उनके घर एक छोटा मेहमान भी आ गया।
सभी घरवाले अड़ोस पड़ोस के लोग उस नन्हे मेहमान को प्यार करने लगे । मेरी बहन जब भी बाजार जाती या घर का कुछ काम करती तो उस छोटे मेहमान को संभालने की जिम्मेदारी मेरी होती थी ।
मैं बड़े प्यार से उस बालक के साथ खेलता उसे संभालता उसकी देखरेख करता था। एक दिन कुछ मेरे दोस्त भी खेलने चले आए और मैं खेलने में इतना मशगूल हो गया कि मुझे इस बात का ध्यान ही नहीं रहा कि उस छोटे बालक की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है ।
मैं दोस्तों के साथ खेल खेलने में मस्त था । बालक की तरफ जरा सा भी ध्यान नहीं था । क्योंकि मैं भी छोटा था और बालक आराम से पलंग पर सो रहा था अचानक पता नहीं हम बच्चों की शोर की वजह से वह छोटा बालक उठ गया और पलंग से सरकते हुए जमीन पर गिर पड़ा ।
भगवान का शुक्र है कि बालक को कोई गंभीर चोट नहीं आई पर जब मेरी बहन को इस बात का पता चला तो हमारे पूरे घर के सदस्यों ने मुझे बहुत फटकार लगाई और गुस्से से दो-तीन तमाचे भी जड़ दिए ।
आज वह बालक काफी बड़ा हो गया है वह एक बहुत ही उच्च पद पर कार्यरत है ।
विवाह हो चुका है उसका भी एक छोटा बालक है पर आज भी जब भी कोई उससे मिलता है या मेरे बारे में बात निकलती है तो वह यही कहता है कि यह वही मामा है जिन्होंने मुझे चारपाई से गिरा दिया था ।
तब मुझे मेरी मां की यह बात याद आती है ।
"वह कहती थी कि बेटा जिंदगी भर खिलाया पर नाम नहीं हुआ पर एक बार गिराया तो जिंदगी भर के लिए नाम हो गया ।"

"बदनाम है तो क्या हुआ नाम तो होगा ना ।"

अक्सर हम लोगों को बाहर वालों से धोखा नहीं होता है खतरा हमेशा घर वालों से ही होता है चाहे तो इतिहास उठाकर देख लो ।
मेरी पिताजी कहते थे आदमी सारी दुनिया से लड़ कर भी जीत सकता है पर स्वयं अपने पेट से हार जाता है ।
घर के अंदर वैमनस्यता -अलगाव -जलन -इन सभी के कारण ही घरों में फूट पड़ती है । हमारे घरों में संस्कार की कमी हो गई है । धर्म नाम का रह गया है प्रेम सिर्फ स्वार्थवश हो गया है। पैसा सबसे महत्वपूर्ण भगवान की तरह हो गया है ।
जब तक परोपकार की भावना निस्वार्थ प्रेम- मदद करने की भावना अहिंसा दया दान की भावना का अपने अंदर ज्योति नहीं जलाओगे तब तक इस संसार रूपी सागर में तुम अपने ही लोगों के हाथों से डुबोऐ जाओगे।

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