चतुर से अधिक चतुराई chatur say adhik chaturai
एक किसान ने पड़ोस के किसान से एक हंडा उधार लिया।वह उसमें मक्खन पिघलाने के लिए आग जला रहा था कि इतने में कहीं से एक बिल्ली आई और हंडे पर पैर रखकर खड़ी हो गई। यह देख उसने बिल्ली को भगाया। बिल्ली पीछे की और कूदी और हंडा भी साथ में गिरकर दो टुकड़े हो गया।
उस किसान में गोंद से दोनों टुकड़े जोड़ दिए और पड़ोस के किसान के पास ले जाकर उससे बोला, “यह लो अपना हंडा।” पड़ोसी ने देखा, हंडे में दरार थी। उसने पूछा, “यह क्या है ?” किसान ने कहा, “मुझे नहीं मालूम।” फिर वह अपने घर वापस चला गया।
पड़ोसी ने अदालत में फरियाद की। किसान ने वकील से सलाह मांगी। वकील ने सब – कुछ सुनकर कहा, “जो कुछ हुआ है, उसके लिए क्योंकि कोई गवाह नहीं है, इसलिए तीन तरह से बात की जा सकती है। तुम कह सकते हो कि जब तुमने हंडा उधार लिया था तभी वह टूटा हुआ था। या कह सकते हो कि तुम्हारे वापस देने के बाद वह टूट गया था। यह भी कर सकते हो कि तुमने हंडा लिया ही नहीं था।”
यद्यपि हंडे का दाम चार आना ही था, तो भी किसान वकील को एक रूपया देकर आया।
अगले दिन अदालत में सुनवाई हुई। किसान ने न्यायाधीश से यों कहा, “हुजूर,जब मैंने वह हंडा लिया, तो वह टूटा हुआ था। यह भी संभव है कि मेरे देने के बाद वो टूट गया हो। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि मैंने हंडा लिया ही ना हो।
किसान यह न समझ पाया कि वकील की सलाह का पूरी तरह पालन करने पर भी न्याय अधिकारी ने क्यों दो रूपये जुर्माना लगाया था। उसको जुर्माना चुकाना पड़ा।
इसी को कहते हैं चतुराई चूल्हे पड़ी।

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