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आचरण सुधारो तो स्थिति सुधर जाएगी aacharan sudharo to sthiti sudhar jayegi


कुपथ्य का त्याग करने पर शरीर की बिगड़ी हुई स्थिति सुधर जाती है।
गलत जोखिम उठाना बंद करने पर व्यापार की बिगड़ी हुई स्थिति सुधर जाती है।
अहंकार को प्राथमिकता न देने पर बिगड़े हुए रिश्तो की स्थिति सुधर जाती है।
पौष्टिक द्रव्यों का सेवन शुरू करने पर शरीर की स्थिति और अधिक अच्छी हो जाती है। योग्य व्यापार में संपत्ति रोकने पर व्यापार की स्थिति और सुदृढ़ हो जाती है।
संबंधों में सद् भाव और स्नेह को प्रधानता देने पर संबंध अधिक मजबूत हो जाते हैं। संक्षिप्त में,
बिगड़ी हुई स्थिति को सुधारने के लिए और सुधरी हुई स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कृत्ति में अर्थात् आचरण में ठोस और सम्यक परिवर्तन करने ही पड़ते हैं।
मात्र अच्छे विचार करते रहने से अथवा अच्छे शब्दों का प्रयोग करते रहने से स्थिति में सुधार नहीं आता है।
याद रखना,
कुएं में हो वही बाल्टी में आता है, यह कहावत पानी के लिए शायद सच होगी परंतु मनुष्य के लिए सच नहीं है।
यह जरूरी नहीं है कि मनुष्य के मन में जो होता है वही उसके शब्दों में आता है और मनुष्य के शब्दों में जो होता है वही उसके आचरण में आता है।
नहीं,
विचार के क्षेत्र में सूअर का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति, शब्द के क्षेत्र में कोयल का प्रतिनिधित्व कर सकता है और शब्द के क्षेत्र में कोयल का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति, आचरण के क्षेत्र में हंस का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
कारण ?
पशु - पक्षी के पास बलप्रयोग और शायद बुद्धिप्रयोग ही है।
परन्तु मनुष्य के पास तो बलप्रयोग और बुद्धिप्रयोग के अतिरिक्त छलप्रयोग भी है। और दु:ख की बात है कि मनुष्य को बलप्रयोग और बुद्धिप्रयोग की अपेक्षा  छलप्रयोग में अधिक विश्वास है।
परंतु….
दंभी आचरण से दूसरों को धोखा देने में सफल हुआ जा सकता है,
किंतु स्वयं की परिस्थिति सुधारने के लिए तो निर्दभ आचरण ही सफल हुआ जा सकता है।
अंतिम बात,
सपने देखकर ही प्रसन्न होने वाले के सपने अधूरे ही रह जाते हैं।


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