Skip to main content

जीवन में आनंद और उत्साह लाने वाली मित्रता जैसे दूसरी कोई चीज नहीं है jivan mein Anand aur utsah laane wali mitrata Jaise dusri koi chij Nahin hai


दीवार खड़ी कर दो और पुल बना दो। प्रसन्नता में फर्क पड़ेगा या नहीं ?
मशीन में रेत डाल दो और तेल डाल दो। मशीन की कार्यशैली में फर्क पड़ेगा या नहीं ?
दूध में नींबू डाल दो और जामन डाल दो।
दूध के रूपांतरण में कोई फर्क पड़ेगा या नहीं ?
जीवों के साथ तुम यदि मित्रता करते हो तो तुम जमीन पर पुल बनाते हो, मशीन में तेल डालते हो और दूध में जामन डालते हो, परंतु यदि किसी के साथ तुम दुश्मनी करते हो तो तुम जमीन पर दीवार खड़ी कर रहे हो, मशीन में रेत डाल रहे हो और दूध में नींबू डाल रहे हो।
मन में प्रश्न प्रश्न तो यह पैदा होता है कि फूल की सुगंध की चाह रखने वाला मनुष्य गटर की ओर जाने के लिए कदम नहीं उठाता है, संपत्ति अर्जित करने की चाह रखने वाला मनुष्य डाकू की ओर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाता है तो फिर आनंद की अनुभूति की चाह रखने वाला मनुष्य जीवों के साथ मित्रता न करते हुए दुश्मनी क्यों कर बैठता होगा ?
क्या कहूं ?
पांव में धंसा हुआ कांटा न निकला हो तो भी प्रसन्नता पूर्वक चलने में शायद सफलता मिल सकेगी परंतु जीवों के प्रति दुश्मनी के  भाव को मन में संग्रहित रखकर प्रसन्नता पूर्वक जीने में सफलता मिले ऐसी कोई संभावना नहीं है।
वास्तविकता का यह होने के बावजूद मनुष्य को मित्रता में संदेह और दुश्मनी में श्रद्धा है। मित्रता में " धोखा " खा जाने का भय है और दुश्मनी में " सलामती " का ख्याल है।
मित्रता में " कमजोरी " के दर्शन है और दुश्मनी में " बहादुरी " की श्रद्धा है।
जहां पेट्रोल में पानी के दर्शन होते हो,
जहां जहर में अमृत के दर्शन होते हो वहां दूसरा भले ही कुछ न किया जा सके परंतु मृत्यु के आगमन को रोका नहीं जा सकता यह बात निश्चित है।
इतना ही कहूंगा कि थोड़े शांत बनें।
आवेश, आग्रह और अहंकार की खतरनाक तिकड़ी की सलाह मनना बंद करें।
" जिंदगी तीन अक्षर का नाम है, उसमें प्रेम के ढाई अक्षर, इन दों का मेल हो जाए तो नहीं युद्ध नहीं लशकर " इस पंक्ति को जीवन में अमली बनाएं, जीवन धन्य बन जाएगा।


Comments

Popular posts from this blog

निंदा - Ninda

निंदा पत्नी ने पति से कहाँ- टीवी कि आवाज जरा कम कर दो इस आवाज की वजह से पडोस मैं जो पति- पत्नी झगड रहे है वह मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। सबक दुसरो कि निंदा सुनने में बडा आंनद आता है इस लिए गुरु के हितकारी प्रवचन हम सुन नहीं सकते हैं। निंदा करना और सुनना प्रवचन सुनने के लिए बाधक भी है और उसके प्रभाव को नाश करने वाला है।

लक्ष्मण को दिया था रावण ने अंतिम संदेश Lakshman ko diya tha ravan ne antim Sandesh

रावण जब मृत्यु शैया पर थे तब राम ने लक्ष्मण से कहा कि, "तुम रावण के पास शीघ्र पहुंचों। उसके पास अमूल्य ज्ञान है, उसे अर्जित करो। उससे जगत के लिए अंतिम संदेश ले आओ।" लक्ष्मण दौड़े। उसने रावण से कहा, "राम रो रहे हैं।" रावण के द्वारा वजह पूछने पर लक्ष्मण ने बताया कि "आपके अंतकाल से व्यथित हुए हैं। मुझे आपके पास अंतिम संदेश प्राप्त करने के लिए भेजा है। बड़े भैया ने कहलवाया है कि "आप अनेक गुणों के भंडार हैं। सीता का अपहरण तो आपकी आकस्मिक (कर्मोदय जनित) भूल थी।" आंख में अश्रु सहित रावण ने कहा कि "मेरे जैसे शत्रु का भी राम गुणकथन करते हैं। इसी लिए राम जगत में भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।" अब आपको मेरा अंतिम संदेश यह है, कि" आज की बात कल पर छोड़नी नहीं चाहिए। मेरी इच्छा थी कि मैं स्वर्गगमन के लिए धरती पर सीढी रखूं, जिससे सभी जीव स्वर्गारोहण कर सकें, कोई भी नरक की दिशा में गति न करें, पर वह कार्य अधूरा ही रह गया। मैंने इस काम में विलंब किया और मौत वेग से आगे बढ़ गई। अब अफसोस करने में क्या लाभ। Rich Dad Poor Dad - 20th Anniversa...

मन में उत्पन्न भावों का प्रभाव अत्यंत बलशाली होता है। Maan main utpann bhavo ka prabhav atyant balshali hota hai.

एक हाथी प्रतिदिन पानी पीने के लिए बाजार में से होकर नदी के किनारे पर जाया करता था। मार्ग में दर्जी की दुकान आती थी। दर्जी पशु - प्रेमी था। हाथी जब भी उधर से गुजरता तो उसे खाने के लिए कुछ ना कुछ जरूर देता। हाथी भी खुश हो जाता। वह भी जब पानी पीकर वापस आता तो उद्यान में से पुष्पों को तोड़कर दर्जी की दुकान पर डाल जाता। प्रतिदिन का यह कार्यक्रम बन गया। एक दिन दर्जी किसी कार्य अवश्य बाहर गया हुआ था। दुकान पर उसका बेटा बैठा हुआ था। हाथी प्रतिदिन के कार्यक्रम के अनुसार दर्जी की दुकान पर जाकर अपनी सूंड को लंबा किया। दर्जी पुत्र को पिता के कार्य की जानकारी ना होने से अपनी भावना के अनुसार हाथी की सूंड पर जोर से सुई लगा दी। हाथी चुपचाप वहां से चला गया। हाथी पंचेइंद्रियों प्राणी है। उसके पास मन है। दर्जी पुत्र के दुर्व्यवहार से उसका मन ग्लानि से भर गया। नदी के किनारे पानी को पीया। प्रतिदिन तो उद्यान में जाकर फूलों को तोड़ता था, आज उसने बगीचे में ना जाकर गंदे नाले के पास गया, वहां सूंड में कीचड़ भर लिया। जैसे ही दर्जी की दुकान के पास पहुंचा और कीचड़ से भरी सूंड को उसकी दुकान पर उछाला। दर्जी पुत्र भी...