संपत्ति विपुल पर स्वभाव रुखा,
सौंदर्य असीम स्वभाव बेकार,
स्वास्थ्य अच्छा और स्वभाव घटिया।
क्या फायदा ?
संपत्ति अल्प पर स्वभाव सुंदर,
सौंदर्य कम पर स्वभाव मस्त,
स्वास्थ्य में गड़बड़ स्वभाव श्रेष्ठ।
क्या नुकसान ?
याद रखना,
भविष्य में ऐसा भी समय आ सकता है
जब गाड़ी पेट्रोल बिना भी चले,
जब मिठाई शक्कर बिना भी बन जाए,
जब मनुष्य बिना पांव भी दौड़ने लगे और जब सायकल पैडल लगाए बिना भी चलने लगे, पर अच्छे स्वभाव के बिना आप प्रसन्नता का अनुभव कर सको, पवित्र बन सको, प्रभुभक्त बन सको या हृदय को प्रेम युक्त रख सको ऐसा तो कभी संभव नहीं होने वाला।
इसका अर्थ ?
यही कि अच्छे स्वभाव के संसेक्स में कभी कमी नहीं आएगी।
अच्छे स्वभाव के बाजार में कभी मंदी नहीं आएगी। अच्छे स्वभाव की मांग कभी नहीं घटेगी।
किसी अज्ञात कवि की यह पंक्तियां पढ़ लो -
" कई व्यक्ति ऐसे खुश सुख मिजाज होते हैं, हंसने के लिए, छोटे - से - छोटा कारण ढूंढते रहते हैं। और कारण शायद न मिले तो अपनी हार स्वीकार कर, हार पर हंस लेते हैं! वैसे तो मेरे शहर में, ऊंचे ऊंचे मकान हैं, उनमें कहीं ऐसे बाग - बगीचे,
नजर आ जाते हैं "
" बाग - बगीचे " अर्थात ?
अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति !
पूछते रहना अपने मन को की किस में रुचि है ?
चौपट हो गए व्यापार को सुधारने में या बिगड़ गए स्वभाव को सुधारने में ?
लक्ष्य क्या है ?
संपत्ति के अर्जन का या स्वभाव के संस्करण का ?
मान्यता क्या है ?
सफलता प्राप्त होती रहे तो जीवन सार्थक है यह या स्वभाव सुंदर बना रहे तो जीवन सार्थक है यह ?
याद रखना,
सफल व्यक्तियों के आकाल से दुनिया की व्यवस्था नहीं बिगड़ती, पर अच्छे व्यक्तियों के आकाल से दुनिया की व्यवस्था अवश्य बिगड़ जाती है !
और कलयुग की यही तो पहचान है !
अच्छे व्यक्तियों के आकाल का युग उसका नाम कलयुग !
इस अकाल से कम से कम हम स्वयं को तो बाहर निकालकर ही रहेंगे !
निंदा पत्नी ने पति से कहाँ- टीवी कि आवाज जरा कम कर दो इस आवाज की वजह से पडोस मैं जो पति- पत्नी झगड रहे है वह मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। सबक दुसरो कि निंदा सुनने में बडा आंनद आता है इस लिए गुरु के हितकारी प्रवचन हम सुन नहीं सकते हैं। निंदा करना और सुनना प्रवचन सुनने के लिए बाधक भी है और उसके प्रभाव को नाश करने वाला है।
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