Skip to main content

दूसरों को जो पहचानता है वह शिक्षित है, पर स्वयं को जो पहचानता है वही सच्चा बुद्धिमान है dusron ko jo pahchanta hai vah shikshit hai, per swayam ko Jo pahchanta hai vahi saccha buddhiman hai


" उसके चलने के अंदाज से मैं उसे पहचान लेता हूं कि वह इंसान कितने पानी में है। उसकी आंखों में आंखें डाल कर मैं पता लगा लेता हूं कि उसके मन में क्या चल रहा है ! उसके कपड़े पहनने के ढंग से मुझे ख्याल आ जाता है कि उस इंसान की प्रकृति कैसी है !"
ऐसी बातें आज अनेकों के मुंह से आपको सुनने को मिलेंगी, पर वास्तविकता यह है कि ऐसी दृष्टि की, ऐसी सूझबूझ की कीमत कौड़ी की भी नहीं है।
तुमने सामने वाले को पहचान लिया इससे तुम्हें क्या फायदा हुआ ?
चोर को चोर के रूप में पहचान लिया, इससे क्या तुम साहूकार बन गए ?
कृपण को कृपण के रूप में पहचान लिया, इससे क्या तुम उदार बन गए ?
दंभी के दंभ को तुमने पकड़ लिया,
इससे क्या तुम सरल बन गए ?
नहीं, बिल्कुल नहीं।
कीमत तो है स्वयं को जान लेने की,
स्वयं को पहचान लेने कि।
" लोग मुझे भले ही गुणवान मानते हो, पर मैं कितने सारे दुर्गुण लिए बैठा हूं यह मुझे पता है ।"
जहां स्वयं की यह पहचान हो जाती है वहां जीवन में क्रांति का सूत्रपात हो जाता है। एक बात याद रखना कि -
असत्य को असत्य के रूप में पहचान लेना यह जैसे सत्य को पाने की शुरुआत है वैसे ही स्वयं को दुर्गुणी के रूप में जान लेना यह स्वयं को सद्गुणी बनाने की शुरुआत है।
मन में शायद यह प्रश्न पैदा हो सकता है कि क्या सत्यदर्शन इतना अधिक चमत्कारी हो सकता है ?
इस प्रश्न का उत्तर हैं " हां "
चेहरे के दाग दर्पण में दिखाई देने के बाद दाग को दूर किए बिना घर के बाहर जाना जैसे संभव नहीं है वैसे ही खुद के जीवन में  रहे हुए अनेक दुर्गुणों का ख्याल आने के बाद उन दुर्गुणों का दूर किए बिना जीवन जीते रहना मुश्किल है ?
संदेश स्पष्ट है ।
अस्पताल में भर्ती हो चुका मरीज जैसे अपने रोग को ही देखता रहता है वैसे ही इस दुनिया के अस्पताल में भर्ती हो चुके हमें अपने दोषों को ही देखते रहना है।


Comments

Popular posts from this blog

निंदा - Ninda

निंदा पत्नी ने पति से कहाँ- टीवी कि आवाज जरा कम कर दो इस आवाज की वजह से पडोस मैं जो पति- पत्नी झगड रहे है वह मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। सबक दुसरो कि निंदा सुनने में बडा आंनद आता है इस लिए गुरु के हितकारी प्रवचन हम सुन नहीं सकते हैं। निंदा करना और सुनना प्रवचन सुनने के लिए बाधक भी है और उसके प्रभाव को नाश करने वाला है।

अनाथ anath

श्रमण अनाथी , नगर के बाहर उपवन में थे युवा अवस्था , भरपूर चैतन्य शक्ति और ऊर्जा का आध्यात्मिक प्रयोग वर्षों की साधना को घंटों में पूर्ण कर रहे थे। एक दिन उपवन में सम्राट श्रेणिक पहुंचे । मुनि के दमकते हुए चेहरे और उभरते हुए यौवन से श्रेणिक विस्मय -विमुग्ध हो उठे। सोचने लगे ,यह सौंदर्य भोग के लिए है या योग के लिए है ? सन्यासी होने का अर्थ यह तो नहीं है कि जीवन के साथ ही अन्याय किया जाए। श्रेणिक मुनि के पास पहुंचे । पूछा ' इस तरह यौवन अवस्था में गृह - त्याग कर सन्यास अपनाने की सार्थकता क्या है ? मुनि ! यह यौवन , भोगों को भोगने के लिए है । तुम उसे क्षीण कर रहे हो । ' मुनि ने कहा , ' नहीं ! मैं ऊर्जा का सदुपयोग कर रहा हूं । वह व्यक्ति भला साधनाओं की पराकाष्ठाओं को कैसे छू पायेगा जो अपना यौवन संसार को सौंपता है और बुढ़ापा परमात्मा को। राजन ! जितनी उर्जा भोग के लिए चाहिए , उससे सौ -गुनी ऊर्जा योग के लिए भी आवश्यक है । ' सम्राट सकपका गया । पूछने लगा ' मुनिवर ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं । ' मुनि ने कहा , ' अनाथी । ' ' अनाथी ! बड़ा विचित्र नाम है। मु...

लक्ष्मण को दिया था रावण ने अंतिम संदेश Lakshman ko diya tha ravan ne antim Sandesh

रावण जब मृत्यु शैया पर थे तब राम ने लक्ष्मण से कहा कि, "तुम रावण के पास शीघ्र पहुंचों। उसके पास अमूल्य ज्ञान है, उसे अर्जित करो। उससे जगत के लिए अंतिम संदेश ले आओ।" लक्ष्मण दौड़े। उसने रावण से कहा, "राम रो रहे हैं।" रावण के द्वारा वजह पूछने पर लक्ष्मण ने बताया कि "आपके अंतकाल से व्यथित हुए हैं। मुझे आपके पास अंतिम संदेश प्राप्त करने के लिए भेजा है। बड़े भैया ने कहलवाया है कि "आप अनेक गुणों के भंडार हैं। सीता का अपहरण तो आपकी आकस्मिक (कर्मोदय जनित) भूल थी।" आंख में अश्रु सहित रावण ने कहा कि "मेरे जैसे शत्रु का भी राम गुणकथन करते हैं। इसी लिए राम जगत में भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।" अब आपको मेरा अंतिम संदेश यह है, कि" आज की बात कल पर छोड़नी नहीं चाहिए। मेरी इच्छा थी कि मैं स्वर्गगमन के लिए धरती पर सीढी रखूं, जिससे सभी जीव स्वर्गारोहण कर सकें, कोई भी नरक की दिशा में गति न करें, पर वह कार्य अधूरा ही रह गया। मैंने इस काम में विलंब किया और मौत वेग से आगे बढ़ गई। अब अफसोस करने में क्या लाभ। Rich Dad Poor Dad - 20th Anniversa...