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महामुनि ने जब एक चुहिया को कन्या बना डाला mahamuni ne jab ek chuhiya ko kanya banaa dala






एक महान तपस्वी एक दिन गंगा में नहाने के लिए गए। स्नान करके वह सूर्य की पूजा करने लगे। तभी उन्होंने देखा कि एक बाज ने झपट्टा मारा और एक चुहिया को पंजे में जकड़ लिया। तपस्वी को चुहिया पर दया आ गई। उन्होंने बाज को पत्थर मारकर चुहिया को छुड़ा लिया। चुहिया तपस्वी के चरणों में दुबककर बैठ गई।





तपस्वी ने सोचा कि चुहिया को लेकर कहाँ घूमता फिरुँगा , इसको कन्या बनाकर साथ लेकर चलता हूँ। तपस्वी ने अपने तप के प्रभाव से चुहिया को कन्या का रूप दे दिया। वह उसे साथ लेकर अपने आश्रम पर आ गए।
तपस्वी की पत्नी ने पूछा - ‘ उसे कहाँ से ले आए ? ’ तपस्वी ने पूरी बात बता दी। दोनों पुत्री की तरह कन्या का पालन - पोषण करने लगे। कुछ दिनों बाद कन्या युवती हो गई। पति - पत्नी को उसके विवाह की चिंता सताने लगी।





तपस्वी ने पत्नी से कहा - ‘ मैं इस कन्या का विवाह भगवान सूर्य से करना चाहता हूँ । ’ पत्नी बोली - ‘ यह तो बहुत अच्छा विचार है। इसका विवाह सूर्य से कर दीजिए । ’ तपस्वी ने सूर्य भगवान का आवाहन किया। भगवान सूर्य उपस्थित हो गए। तपस्वी ने अपनी पुत्री से कहा - ‘ यह सारे संसार को प्रकाशित करने वाले भगवान सूर्य हैं। क्या तुम इनसे विवाह करोगी ?’





लड़की ने कहा - ‘ उनका स्वभाव तो बहुत गरम है। जो इनसे उत्तम हो , उसे बुलाइए। ’ लड़की की बात सुनकर सूर्य ने सुझाव दिया - ‘ मुझसे श्रेष्ठ तो बादल है। वह तो मुझे भी ढक लेता है ।’ तपस्वी ने मंत्र द्वारा बादल को बुलाया और अपनी पुत्री से पूछा - ‘ क्या तुम्हें बादल पसंद है ? ’लड़की ने कहा - ‘ यह तो काले रंग का है। कोई इससे भी उत्तम वर हो तो बताइए। ’





तब तपस्वी ने बादल से ही पूछा - ‘ तुमसे जो उत्तम हो , उसका नाम बताओ। ’ बादल ने बताया - ‘ मुझसे उत्तम वायु देवता हैं। वह तो मुझे भी उड़ा ले जाते हैं। ’ तपस्वी ने वायु देवता का आवाहन किया। वायु को देखकर लड़की ने कहा - ‘ वायु है तो शक्तिशाली , पर चंचल बहुत है। यदि कोई इससे अच्छा हो तो उसे बुलाइए। ’





तपस्वी ने वायु से पूछा - ‘ बताओ , तुमसे अच्छा कौन है ? ’ वायु ने कहा - ‘ मुझसे श्रेष्ठ तो पर्वत ही होता है। वह मेरी गति को भी रोक देता है। ’ तपस्वी ने पर्वत को बुलाया। पर्वत के आने पर लड़की ने कहा - ‘ पर्वत तो बहुत कठोर है। किसी दूसरे वर की खोज कीजिए। ’





तपस्वी ने पर्वत से पूछा - ‘ पर्वतराज , तुम अपने से श्रेष्ठ किसे मानते हो ? ’ पर्वत ने कहा - ‘ चूहे मुझसे भी श्रेष्ट होते हैं। वे मेरे शरीर में भी छेद कर देते हैं। ’ तपस्वी ने चूहों के राजा को बुलाया और पुत्री से प्रश्न किया - ‘ क्या तुम इसे पसंद करती हो ? ’ लड़की चूहे को देखकर बड़ी प्रसन्न हुई और उससे विवाह करने को तैयार हो गई।





वह बोली - ‘ पिताजी , आप मुझे फिर से चुहिया बना दीजिए। मैं इनसे विवाह करके आनंदपूर्वक रह सकूँगी। ’ तपस्वी ने उसे फिर से चुहिया बना दिया।


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