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संघर्ष से सफलता sangharsh se safalta

संघर्ष का क्या मतलब है और संघर्ष किस प्रकार करना चाहिए, यह बात भी महत्वपूर्ण है। व्यक्ति कोई भी लक्ष्य लेकर उसे पूरा करने के लिए अपने कार्य का निर्धारण करता है। उस निर्धारित किए गए कार्य से जब वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तो उसे अपने प्रयासों और बढ़ाना पड़ता है। उसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो कुछ विशेष करने के लिए सोचना पड़ता है। ऐसे निर्णय भी लेने पड़ते हैं, जिनको लेने के लिए मन पहले तैयार नहीं था। यह प्रक्रिया जितनी ज्यादा बार चलती है, उतना ही वह संघर्ष कहलाता है। मन कार्य के प्रति सहज रूप से तैयार हो जाता है, तो संघर्ष का आभास नहीं होता है और मन को तैयार करने में जितनी ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, उतना ही संघर्ष का आभास ज्यादा होता है। जो कार्य व्यक्ति की क्षमता में हो, वहां तक कार्य करना भी संघर्ष नहीं कहलाता है, लेकिन जब क्षमताओं को और बढ़ाएं बिना वह कार्य संभव नहीं हो पा रहा हो, तो वह संघर्ष का आभास देता है। किसी के जीवन में बार-बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जिनमें वह अपना काफी कुछ खो देता है। फिर से उसे नया खड़ा करना पड़ता है, वह स्थिति भी संघर्ष पूर्ण स्थिति कहलाती ह...

अवसर को पहचानो avsar ko pehchano

कई लोगों के पास यह बहाना होता है कि हमें तो जिंदगी में कोई अच्छा अवसर ही नहीं मिला, इसीलिए हमें छोटा-मोटा कार्य करके जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। यह सिर्फ मन की कमजोरी को छुपाने का एक बहाना मात्र है। हर मनुष्य के जीवन में अनेक बेहतरीन अवसर आते हैं, लेकिन वह आलस्य , असफलता का भय, आत्मविश्वास की कमी या निर्णय क्षमता के अभाव के कारण उन्हें ठुकरा देता है। कोई भी इंसान याद करें, तो उसको याद आ जाएगा कि उसके जीवन में कितने अवसर आए थे। उसके सामने ही कुछ लोगों ने उस अवसर को स्वीकार किया और उससे बहुत आगे निकल गए। यहां तक कि इंसान जो कार्य कर रहा है, उसे भी एक बड़े अवसर के रूप में करे, तो हर कार्य में भी एक बड़ा अवसर छुपा है। बहादुर तो वे होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में एक अच्छे अवसर का निर्माण कर लेते हैं। पर यह सब कर वे ही पाते हैं, जो बचाव का रास्ता नहीं अपनाते हैं, बल्कि कार्य को उत्साह पूर्वक करते हैं। मेहनत करने से मुंह नहीं मोड़ते हैं। संघर्षशील इंसान तो हर जगह अवसर बना लेते हैं , लेकिन बचाव प्रवृत्ति वाले इंसान अच्छे से अच्छे अवसर को भी ठुकरा देते हैं। जिंदगी में अवसरों की कमी नहीं ...

तनाव का कारण Tanav ka Karan

तनाव का सबसे बड़ा कारण बचाव प्रवृत्ति है। जब मन स्थितियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता, तो मन में हमेशा असुरक्षा का भय बैठा रहता है। हर स्थिति उसे डरावनी लगती है। मन निरमूल आशंकाओं से घिरा रहता है। इंसान खुद के प्रति अरुचिकर हो जाता है और वह किसी भी स्थिति को तनाव की वजह बना लेता है। ऐसा नहीं है कि ज्यादा बुरी स्थितियां ही तनाव का कारण बनती है। सामान्य - सी स्थिति भी तनाव का कारण बन सकती है और इंसान बुरी से बुरी स्थिति को भी स्वीकार कर ले, तो तनाव से बच सकता है। जब मन में स्वीकार भाव आता है, तो मन सामना करने के लिए तैयार हो जाता है और तनाव नहीं होता है। इसलिए इस स्थितियों से जितना भागने की कोशिश करेंगे, उतनी ही वे दिमाग पर ज्यादा हावी होंगी और तनाव बढ़ेगा। स्थितियों का सामना करने की तैयारी रखना ही समझदारी है। तनाव का सबसे बड़ा कारण भी तनाव ही होता है, जब बार-बार इंसान के मन में यह बिठा दिया जाता है कि तनाव नहीं करना चाहिए। तनाव बुरी चीज है, तो जब थोड़ा सा भी तनाव उसे होता है, तो वह उससे परेशान होने लगता है और जो उसे तनाव हो गया उसी बात को लेकर और अधिक तनाव में आ जाता है। ...

भगवान को मनाने का प्रयास bhagwan ko manane Ka prayas

व्यक्ति भगवान के पास भी सिर्फ अपनी सुरक्षा का उपाय करने के लिए ही जाता है। वहां उसका एक ही ध्येय होता है कि जिन इच्छाओं को मैं अपने पुरुषार्थ से पूरा नहीं कर पाया, वह सब भगवान के सामने विनती करने से पूरी हो जाएंगी।वह हर तरह से भगवान को मनाने का प्रयास करता है। भगवान के सामने जाकर अपने आप को दीन - हीन स्वीकार करता है, अपने आपको मूर्ख- अज्ञानी स्वीकार करता है, ताकि भगवान को तरस आ जाए और उसकी सभी अधूरी इच्छाएं पूरी हो जाएं। कितने सरल रास्ते से व्यक्ति अपनी सुरक्षा का इंतजाम करना चाहता है। यही नहीं जब बार-बार विनती करने पर भी वह कुछ हासिल नहीं होता, तो भी उसकी समझ में यह नहीं आता है कि मांगने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। कुछ हासिल करना है, तो पुरुषार्थ करना होगा। इसके बजाय वह यह सोचता है कि भगवान को मनाने में मुझसे कुछ कमी रह गई लगती है, इसीलिए मैं अब दोबारा प्रयास करता हूं। वह अबकी बार थोड़ा क्रिया - कर्म और बढ़ा लेता है। थोड़ी पूजन सामग्री, थोड़ा समय, थोड़ा अनुनय - विनय और बड़ा लेता है। शायद अबकी बार भगवान मान जाएं। ऐसा वह जीवन भर करता रहता है और हर बार अलग-अलग तरीकों से भगव...

बेसहारे का सहारा Beshare ka Shara

जब व्यक्ति यह सोचता है कि काश ! मुझे जीवन में ऐसा कोई मजबूत सहारा मिल जाए जिसकी मदद से मैं कामयाब हो सकूं, तो व्यक्ति यह ख़ुद ही स्वीकार कर लेता है कि वह बहुत कमजोर है। जब व्यक्ति बार-बार यह सोचता है, तो वह और कमजोर होता चला जाता है। हर असफलता के बाद यही सोचता रहता है कि मुझे कोई सहारा नहीं मिला, इसीलिए मैं सफल नहीं हो पाया। फिर वह अपनी सफलता के लिए अकेले संघर्ष करने का प्रयास नहीं करता, बल्कि वह हर असफलता के बाद कोई दूसरा सहारा खोजने का प्रयास करता रहता है। यह प्रवृति व्यक्ति को आत्म-निर्भर बनने से रोकती रहती है, और आत्म-निर्भर बने बिना कामयाबी मिल नहीं सकती। इसीलिए जीवन में सहारे खोजने में ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि खुद में ही जीवन की जंग को जीतने का साहस पैदा करना चाहिए। सहारा लेने में तो बहुत बड़ा जोखिम है। सहारा नहीं मिला, तो परेशानी , सहारा गलत मिल गया, तो उससे भी बड़ी परेशानी और सहारा मिलकर बीच में छूट गया, तो पूरी तरह बेसहारा होने की सबसे बड़ी परेशानी। इसलिए जीवन की गाड़ी को किसी के सहारे चलाने की निर्भरता नहीं होनी चाहिए। आपको कोई सहारा मिल भी रहा है, तो अपने आपमे...

विश्वास है तो आप कामयाब हो.. vishwas hai to aap kamyab ho..

सफलता का मतलब है.... अमीरी - शानदार घर, मजेदार छुट्टियां, यात्रा, नई चीजें, आर्थिक सुरक्षा, अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खुशाली देना। सफलता का मतलब है प्रशंसा का पात्र बनना, लीडर बनना, अपने बिजनेस और सामाजिक जीवन में सम्मान पाना। सफलता का मतलब है आजादी - चिंताओं, डर कुंठाओं और असफलता से आजादी। सफलता का मतलब है आत्म - सम्मान, जिंदगी का असली सुख और जीवन में संतुष्टि, जो लोग आप पर निर्भर है उनके लिए अधिक से अधिक करने की क्षमता। सफलता - उपलब्धि - मनुष्य के जीवन का लक्ष्य है। यकीन कीजिए, सचमुच यकीन कीजिए कि आप पहाड़ हिला सकते हैं, और आप वाकई ऐसा कर सकते हैं। ज्यादातर लोगों को यह यकीन ही नहीं होता कि उनमें पहाड़ हिलाने की क्षमता है। इसका परिणाम यह होता है कि वह ऐसा कभी नहीं कर पाते। 'मुझे विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूं' वाला रवैया हमें वह शक्ति, योग्यता और ऊर्जा देता है जिसके सहारे हम वह काम कर पाते हैं। जब आपको यकीन होता है कि आप कोई काम कर सकते हैं, तो आपको अपने आप पता चल जाता है कि इसे कैसे किया जा सकता है । जिस आदमी को विश्वास होता है कि वह काम कर लेगा, उसे हमेशा उस काम को क...

बच्चे की चाल मास्टर बेहाल bacche ki chaal master behal

बच्चे की चाल मास्टर बेहाल bacche ki chaal master behal एक वाक्या याद आ गया। बड़ा मजेदार वाक्या है। हुआ यूं कि एक बच्चा मास्टर के पास पहुंचा और बोला – गुरुजी! कल रात आपके बाप मेरे सपने में आए। मास्टर बोला – मेरे बाप! और तेरे सपने में ? झूठ, बिल्कुल सफेद झूठ। मेरे बाप तेरे सपने में आ ही नहीं सकते। बच्चा बोला – गुरुजी, आप मेरा विश्वास करें। आपके पिताजी मेरे सपने में सच में आए थे। मास्टर ने कहा – लेकिन मेरे बाप को मरे तो पांच साल हो गए, आज तक मेरे सपने में नहीं आए तो आए तेरे सपने में कैसे आ गए ? बच्चा बोला – गुरुजी, आपके सपने में नहीं आए तो मैं क्या करूं ? और यह कोई जरूरी भी नहीं है कि आप के बाप हैं तो केवल आप ही के सपने में आए। और किसी के सपने में ना आए। मास्टर ने कहा – हां, ऐसा कोई जरूरी नहीं है। पर वो तेरे सपने में कैसे आ गए ? बच्चा बोला – बस बाई चांस। मास्टर ने कहा – अच्छा ठीक है, बोल, मेरे बाप क्या कह रहे थे ? बच्चे ने कहा – मास्टर जी ! और तो कुछ नहीं बोले। बस केवल यही कहा कि कल तू मेरे बेटे के पास जाना और उससे कहना कि वह तुझे अच्छे नंबरों से पास कर दे। मास्टर ने कहा – ...