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प्रभावित करने का आसान तरीका। Prabhavit karne ka aasan tarika.

आपके चेहरे के भाव आपके कपड़ो से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। हमारे काम शब्दों से ज्यादा तेज स्वर में बोलते हैं। आपकी मुस्कुराहट कहती है मैं आपको पसंद करता हूं, आपसे मिलकर मुझे खुशी होती है, आपको देखकर मैं खुश हुआ। वह असली मुस्कुराहट एक ऐसी मुस्कान जो दिल से आती है और दिल तक पहुंचती है और इसीलिए बाजार में उसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है। मुस्कुराने वाले लोग ज्यादा अच्छी तरह से सीखा और बेच पाते हैं, और अपने बच्चों को ज्यादा सुखद ढंग से पाल पाते हैं। मुस्कान में तेवर से ज्यादा शक्ति होती है। इसीलिए कोई भी बात सिखाने के लिए प्रोत्साहन दंड की तुलना में ज्यादा प्रभावी तरीका होता है। मुस्कान का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है चाहे वह प्रभाव हमें दिखाई दे या ना दे। आप फोन पर बातें करते समय मुस्कुराए आपकी "मुस्कुराहट" आपकी आवाज में सुनाई दे जाती है। जब लोगों को किसी काम में मजा नहीं आता है, तब तक वह उसमें सफल नहीं हो पाते। जब मैं मुस्कुराता हूं तो सचमुच जिंदादिल लगता हूं। मैंने लोगों की बुराई करना छोड़ दिया है। मैं आलोचना करने के बजाय प्रशंसा और सराहना करने लग...

नाम से ही सारे दु:ख दूर हो जाएंगे। Naam say hi saree dukh dur ho jaenge.

एक बार की बात है माता अंजना हनुमान जी को कुटी में लिटाकर कहीं बाहर चली गई। थोड़ी देर में इन्हें बहुत तेज भूख लगी। इतने में आकाश में सूर्य भगवान उगते हुए दिखलायी दिये। इन्होंने समझा यह कोई लाल लाल सुंदर मीठा फल है। बस, एक ही छलांग में यह सूर्य भगवान के पास जा पहुंचे और उन्हें पकड़कर मुंह में रख लिया। सूर्य ग्रहण का दिन था। राहु सूर्य को ग्रसने के लिए उनके पास पहुंच रहा था। उसे देखकर हनुमानजी ने सोचा यह कोई काला फल है, इसीलिए उसकी और भी झपटे। राहु किसी तरह भागकर देवराज इंद्र के पास पहुंचा। उसने कांपते हुए स्वरों में इंद्रदेव से कहा, "भगवान! आज आपने यह कौन सा दूसरा राहु सूर्य को ग्रसने के लिए भेज दिया है ? यदि मैं भागा ना होता तो वह मुझे भी खा गया होता। राहु की बात सुनकर भगवान इंद्र को बड़ा अचंभा हुआ। वह अपने सफेद एरावत हाथी पर सवार हो हाथ में वज्र लिए बाहर निकले। उन्होंने देखा कि एक वानर बालक सूर्य को मुंह में दबाए आकाश में खेल रहा है। हनुमान ने भी सफेद एरावत सवार इंद्र को देखा। उन्होंने समझा कि यह भी कोई खाने लायक सफेद फल है। वह उधर भी झपट पड़े। यह देखकर देवराज इंद्र बहुत ही क्रोधि...

मैं कौन हूं ? पहचानो। Main kaun kaun hoon pehchano.

इस संसार में मेरा कोई नहीं है और मैं किसी का नहीं हूं। यह विचार करना एकत्व भावना है। हजारों लोग ट्रेन में आपके साथ होने के बावजूद भी अपना कोई न हो और यदि कोई आपसे पूछे कि आपके साथ कौन-कौन हैं ? आप यही कहेंगे कि मैं अकेला आया हूं। इसी प्रकार जीव संसार में स्वजन आदि के साथ रहते हुए भी किसी के ममत्व में न फॅसकर एकत्व भावना से रहें। क्योंकि जीव अकेला आया है और अकेला ही जाने वाला। सलीम रोज खुदा को प्रार्थना करता है कि मुझे सौ सोना मुहर देना यदि एक भी कम की तो मैं नहीं लूंगा।उसके पड़ोसी ने परीक्षा करने के लिए उसे नब्बे सोना मुहर दी और उसने ले ली।तब पड़ोसी ने कहा - "तूने तो खुदा से कहा था कि एक भी सुना मोहर्रम होगी तो मैं नहीं लूंगा फिर अभी क्यों ले ली ?" सलीम ने कहा "इससे तुम्हें क्या मतलब ?" इस बात पर दोनों के बीच बहुत झगड़ा हुआ। तब पड़ोसी ने कहा कि, काजी के पास चलो वही हमारा न्याय करेंगे। तब सलीम ने कहा, नहीं, मैं नहीं आऊंगा, क्योंकि मेरे कपड़े अच्छे नहीं हैं, तब पड़ोसी ने उसे कपड़े लाकर दिए। तब सलीम ने पगड़ी मोजड़ी मांगी। पड़ोसी ने वह भी लाकर दिए, तब सलीम ने घोड़ा मां...

संघर्ष से सफलता sangharsh se safalta

संघर्ष का क्या मतलब है और संघर्ष किस प्रकार करना चाहिए, यह बात भी महत्वपूर्ण है। व्यक्ति कोई भी लक्ष्य लेकर उसे पूरा करने के लिए अपने कार्य का निर्धारण करता है। उस निर्धारित किए गए कार्य से जब वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तो उसे अपने प्रयासों और बढ़ाना पड़ता है। उसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो कुछ विशेष करने के लिए सोचना पड़ता है। ऐसे निर्णय भी लेने पड़ते हैं, जिनको लेने के लिए मन पहले तैयार नहीं था। यह प्रक्रिया जितनी ज्यादा बार चलती है, उतना ही वह संघर्ष कहलाता है। मन कार्य के प्रति सहज रूप से तैयार हो जाता है, तो संघर्ष का आभास नहीं होता है और मन को तैयार करने में जितनी ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, उतना ही संघर्ष का आभास ज्यादा होता है। जो कार्य व्यक्ति की क्षमता में हो, वहां तक कार्य करना भी संघर्ष नहीं कहलाता है, लेकिन जब क्षमताओं को और बढ़ाएं बिना वह कार्य संभव नहीं हो पा रहा हो, तो वह संघर्ष का आभास देता है। किसी के जीवन में बार-बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जिनमें वह अपना काफी कुछ खो देता है। फिर से उसे नया खड़ा करना पड़ता है, वह स्थिति भी संघर्ष पूर्ण स्थिति कहलाती ह...

अवसर को पहचानो avsar ko pehchano

कई लोगों के पास यह बहाना होता है कि हमें तो जिंदगी में कोई अच्छा अवसर ही नहीं मिला, इसीलिए हमें छोटा-मोटा कार्य करके जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। यह सिर्फ मन की कमजोरी को छुपाने का एक बहाना मात्र है। हर मनुष्य के जीवन में अनेक बेहतरीन अवसर आते हैं, लेकिन वह आलस्य , असफलता का भय, आत्मविश्वास की कमी या निर्णय क्षमता के अभाव के कारण उन्हें ठुकरा देता है। कोई भी इंसान याद करें, तो उसको याद आ जाएगा कि उसके जीवन में कितने अवसर आए थे। उसके सामने ही कुछ लोगों ने उस अवसर को स्वीकार किया और उससे बहुत आगे निकल गए। यहां तक कि इंसान जो कार्य कर रहा है, उसे भी एक बड़े अवसर के रूप में करे, तो हर कार्य में भी एक बड़ा अवसर छुपा है। बहादुर तो वे होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में एक अच्छे अवसर का निर्माण कर लेते हैं। पर यह सब कर वे ही पाते हैं, जो बचाव का रास्ता नहीं अपनाते हैं, बल्कि कार्य को उत्साह पूर्वक करते हैं। मेहनत करने से मुंह नहीं मोड़ते हैं। संघर्षशील इंसान तो हर जगह अवसर बना लेते हैं , लेकिन बचाव प्रवृत्ति वाले इंसान अच्छे से अच्छे अवसर को भी ठुकरा देते हैं। जिंदगी में अवसरों की कमी नहीं ...

तनाव का कारण Tanav ka Karan

तनाव का सबसे बड़ा कारण बचाव प्रवृत्ति है। जब मन स्थितियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता, तो मन में हमेशा असुरक्षा का भय बैठा रहता है। हर स्थिति उसे डरावनी लगती है। मन निरमूल आशंकाओं से घिरा रहता है। इंसान खुद के प्रति अरुचिकर हो जाता है और वह किसी भी स्थिति को तनाव की वजह बना लेता है। ऐसा नहीं है कि ज्यादा बुरी स्थितियां ही तनाव का कारण बनती है। सामान्य - सी स्थिति भी तनाव का कारण बन सकती है और इंसान बुरी से बुरी स्थिति को भी स्वीकार कर ले, तो तनाव से बच सकता है। जब मन में स्वीकार भाव आता है, तो मन सामना करने के लिए तैयार हो जाता है और तनाव नहीं होता है। इसलिए इस स्थितियों से जितना भागने की कोशिश करेंगे, उतनी ही वे दिमाग पर ज्यादा हावी होंगी और तनाव बढ़ेगा। स्थितियों का सामना करने की तैयारी रखना ही समझदारी है। तनाव का सबसे बड़ा कारण भी तनाव ही होता है, जब बार-बार इंसान के मन में यह बिठा दिया जाता है कि तनाव नहीं करना चाहिए। तनाव बुरी चीज है, तो जब थोड़ा सा भी तनाव उसे होता है, तो वह उससे परेशान होने लगता है और जो उसे तनाव हो गया उसी बात को लेकर और अधिक तनाव में आ जाता है। ...

भगवान को मनाने का प्रयास bhagwan ko manane Ka prayas

व्यक्ति भगवान के पास भी सिर्फ अपनी सुरक्षा का उपाय करने के लिए ही जाता है। वहां उसका एक ही ध्येय होता है कि जिन इच्छाओं को मैं अपने पुरुषार्थ से पूरा नहीं कर पाया, वह सब भगवान के सामने विनती करने से पूरी हो जाएंगी।वह हर तरह से भगवान को मनाने का प्रयास करता है। भगवान के सामने जाकर अपने आप को दीन - हीन स्वीकार करता है, अपने आपको मूर्ख- अज्ञानी स्वीकार करता है, ताकि भगवान को तरस आ जाए और उसकी सभी अधूरी इच्छाएं पूरी हो जाएं। कितने सरल रास्ते से व्यक्ति अपनी सुरक्षा का इंतजाम करना चाहता है। यही नहीं जब बार-बार विनती करने पर भी वह कुछ हासिल नहीं होता, तो भी उसकी समझ में यह नहीं आता है कि मांगने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। कुछ हासिल करना है, तो पुरुषार्थ करना होगा। इसके बजाय वह यह सोचता है कि भगवान को मनाने में मुझसे कुछ कमी रह गई लगती है, इसीलिए मैं अब दोबारा प्रयास करता हूं। वह अबकी बार थोड़ा क्रिया - कर्म और बढ़ा लेता है। थोड़ी पूजन सामग्री, थोड़ा समय, थोड़ा अनुनय - विनय और बड़ा लेता है। शायद अबकी बार भगवान मान जाएं। ऐसा वह जीवन भर करता रहता है और हर बार अलग-अलग तरीकों से भगव...